पंचायती राज
पंचायती राज भारत की ग्रामीण स्थानीय स्वशासन प्रणाली है। इसका उद्देश्य गाँव के लोगों को अपने क्षेत्र के विकास, प्रशासन और निर्णय-निर्माण में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर प्रदान करना है। इसे लोकतंत्र की आधारशिला कहा जाता है क्योंकि इसके माध्यम से शासन की शक्ति गाँव के स्तर तक पहुँचती है। पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण विकास, जनकल्याण और स्थानीय समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में पंचायती राज की अवधारणा प्राचीन काल से चली आ रही है। स्वतंत्रता के बाद इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई समितियों का गठन किया गया। **बलवंत राय मेहता समिति (1957)** ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की। इसके बाद **73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992** पारित किया गया, जो **24 अप्रैल 1993** से लागू हुआ। इस संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। भारत में पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था है— 1. ग्राम पंचायत – यह गाँव स्तर की संस्था है। इसका प्रमुख सरपंच (प्रधान) होता है। ग्राम पंचायत स्थानीय विकास कार्य, स्वच्छता, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट तथा सर...