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Showing posts from June, 2026

राजनीतिक विचार (Political Thought)

  राजनीतिक विचार (Political Thought) राजनीतिक विचार राजनीति विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो राज्य, सरकार, सत्ता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों से संबंधित विचारों का अध्ययन करती है। यह विभिन्न विचारकों द्वारा समय-समय पर प्रस्तुत राजनीतिक अवधारणाओं और सिद्धांतों का संग्रह है। राजनीतिक विचार समाज और राज्य के संगठन, शासन व्यवस्था तथा नागरिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए दिशा प्रदान करता है। राजनीतिक विचारों का इतिहास बहुत प्राचीन है। प्राचीन काल में लोगों ने समाज और राज्य की व्यवस्था को समझने तथा उसे सुधारने के लिए विभिन्न विचार प्रस्तुत किए। यूनान के महान दार्शनिक Plato ने अपनी प्रसिद्ध कृति Republic में आदर्श राज्य की कल्पना प्रस्तुत की। उनके शिष्य Aristotle ने राज्य को एक प्राकृतिक संस्था माना और उसे मानव जीवन के विकास के लिए आवश्यक बताया। भारत में Chanakya ने अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र में शासन, प्रशासन और कूटनीति से संबंधित महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। मध्यकाल में राजनीतिक विचार धर्म से प्रभावित रहे। इस काल में चर्च और धार्मिक संस्थाओं का समाज ...

राजनीतिक सिद्धांत (Political Theory)

  राजनीतिक सिद्धांत (Political Theory) राजनीतिक सिद्धांत राजनीति विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो राज्य, सरकार, सत्ता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, अधिकार तथा कर्तव्यों जैसे राजनीतिक विषयों का अध्ययन करती है। यह केवल राजनीतिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का वर्णन नहीं करती, बल्कि यह भी बताती है कि समाज और राज्य को किस प्रकार संचालित किया जाना चाहिए। राजनीतिक सिद्धांत राजनीति के आदर्शों, मूल्यों और सिद्धांतों को समझने का माध्यम है। राजनीतिक सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक जीवन से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देना है। जैसे— राज्य क्या है? सरकार का उद्देश्य क्या होना चाहिए? नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य क्या हैं? समाज में न्याय और समानता कैसे स्थापित की जा सकती है? इन प्रश्नों के उत्तर खोजने का कार्य राजनीतिक सिद्धांत करता है। प्राचीन काल से ही राजनीतिक सिद्धांत का विकास होता आया है। प्राचीन यूनान के दार्शनिकों जैसे Plato और Aristotle ने आदर्श राज्य और शासन व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। मध्यकाल में राजनीतिक विचार धर्म से प्रभावित रहे, जबकि आधुनिक युग में स्वतंत्रता, ...

जवाहरलाल नेहरू

  जवाहरलाल नेहरू  जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी थे। उनका जन्म 14 नवंबर 1889 को Jawaharlal Nehru के रूप में Prayagraj (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुआ था। उनके पिता Motilal Nehru एक प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे तथा उनकी माता स्वरूप रानी नेहरू थीं। नेहरू जी का पालन-पोषण एक समृद्ध परिवार में हुआ, जिससे उन्हें उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रारंभिक शिक्षा घर पर प्राप्त करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। उन्होंने Trinity College Cambridge से शिक्षा प्राप्त की और बाद में कानून की पढ़ाई पूरी की। भारत लौटने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की, लेकिन शीघ्र ही वे देश की स्वतंत्रता के आंदोलन से जुड़ गए। Mahatma Gandhi के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया। नेहरू जी ने भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने के लिए अनेक आंदोलनों में हिस्सा लिया। उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई ब...

विधायक

   विधायक विधायक लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। विधायक वह जनप्रतिनिधि होता है जिसे किसी राज्य के विधानसभा क्षेत्र की जनता प्रत्यक्ष मतदान द्वारा चुनती है। विधायक का मुख्य कार्य राज्य की विधानसभा में जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं को प्रस्तुत करना तथा राज्य के विकास के लिए कानून बनाने में भाग लेना होता है।  भारत में प्रत्येक राज्य की अपनी विधानसभा होती है, जिसके सदस्य विधायक कहलाते हैं। विधायक का चुनाव सामान्यतः पाँच वर्ष के लिए किया जाता है। विधानसभा चुनाव में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करके विधायक का चुनाव करते हैं।  चुनाव जीतने वाला उम्मीदवार अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है और जनता तथा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करता है। विधायक का सबसे प्रमुख कार्य कानून निर्माण में भाग लेना है। विधानसभा में विभिन्न विषयों पर चर्चा होती है और राज्य के हित में नए कानून बनाए जाते हैं। विधायक इन चर्चाओं में भाग लेकर जनता की राय और आवश्यकताओं को सरकार तक पहुँचाते हैं।  इसके अतिरिक्त वे राज्य सरकार की नीतिय...

राज्य

  राज्य (State) : अर्थ, तत्व एवं कार्य   राजनीति विज्ञान में राज्य एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। राज्य एक संगठित राजनीतिक संस्था है, जो निश्चित भू-भाग में रहने वाले लोगों पर शासन करती है। राज्य का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, सुरक्षा, न्याय और व्यवस्था बनाए रखना है। राज्य के बिना संगठित सामाजिक जीवन की कल्पना करना कठिन है।   राज्य का अर्थ राज्य वह राजनीतिक संगठन है जिसमें एक निश्चित जनसंख्या, क्षेत्र, सरकार तथा संप्रभुता होती है। ये चारों तत्व राज्य के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं। यदि इनमें से कोई एक तत्व भी न हो, तो राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती।   राज्य के तत्व  1. जनसंख्या (Population) जनसंख्या राज्य का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। राज्य लोगों से मिलकर बनता है। जनसंख्या के बिना राज्य का अस्तित्व संभव नहीं है। किसी राज्य की जनसंख्या कम या अधिक हो सकती है, लेकिन लोगों का होना आवश्यक है। 2. क्षेत्र (Territory) क्षेत्र से तात्पर्य राज्य की निश्चित भौगोलिक सीमाओं से है। इसमें भूमि, जल और वायु क्षेत्र शामिल होते हैं। प्रत्येक राज्य का अपना निश्चित क्षेत्र होता है,...

राजनीति विज्ञान का परिचय

  राजनीति विज्ञान का परिचय : अर्थ, परिभाषा, प्रकृति एवं क्षेत्र तथा महत्व   राजनीति विज्ञान सामाजिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो राज्य, सरकार, सत्ता, अधिकार, कर्तव्य तथा राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन करती है। यह मनुष्य के राजनीतिक जीवन और शासन व्यवस्था से संबंधित विषयों का व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक अध्ययन है। राजनीति विज्ञान हमें यह समझने में सहायता करता है कि राज्य कैसे कार्य करता है, सरकार किस प्रकार निर्णय लेती है तथा नागरिकों और शासन के बीच क्या संबंध होते हैं। आधुनिक युग में राजनीति विज्ञान का महत्व लगातार बढ़ रहा है क्योंकि यह लोकतंत्र, न्याय, समानता और नागरिक अधिकारों की समझ विकसित करता है। राजनीति विज्ञान का अर्थ 'राजनीति विज्ञान' शब्द अंग्रेजी के "Political Science" का हिंदी रूपांतरण है। यह शब्द यूनानी भाषा के "Polis" से बना है, जिसका अर्थ नगर-राज्य होता है। प्रारंभ में राजनीति विज्ञान का अध्ययन केवल राज्य और सरकार तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसका क्षेत्र व्यापक हो गया। आज राजनीति विज्ञान में राजनीतिक संस्थाओं, राजनीतिक व्यवहार, सार्वजनिक नीति...

अंतरराष्ट्रीय राजनीति

  अंतरराष्ट्रीय राजनीति : अंतरराष्ट्रीय संबंध, संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO), वैश्वीकरण और विदेश नीति  अंतरराष्ट्रीय राजनीति राजनीति विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो विभिन्न देशों के बीच संबंधों, सहयोग, संघर्ष और नीतियों का अध्ययन करती है। आज के समय में विश्व के सभी देश किसी न किसी रूप में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय राजनीति का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। यह विश्व शांति, सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अंतरराष्ट्रीय संबंध:   अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अर्थ विभिन्न देशों के बीच स्थापित राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों से है। ये संबंध सहयोग, व्यापार, कूटनीति, सुरक्षा और विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विकसित होते हैं। प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और विकास के लिए अन्य देशों के साथ संबंध स्थापित करता है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के माध्यम से देशों के बीच मित्रता, सहयोग और पारस्परिक समझ बढ़ती है। साथ ही, यह वैश्विक समस्याओं जैसे आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और महामारी से निपटने में...

चुनाव प्रणाली

चुनाव प्रणाली   चुनाव प्रणाली : चुनाव का महत्व, निर्वाचन आयोग, मतदान प्रक्रिया और चुनाव सुधार चुनाव प्रणाली किसी भी लोकतांत्रिक देश की आधारशिला होती है। लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन चुनाव के माध्यम से करती है। चुनाव केवल सरकार बनाने का साधन नहीं है, बल्कि यह जनता को शासन में भागीदारी का अधिकार भी प्रदान करता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ नियमित रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोजित किए जाते हैं। चुनाव प्रणाली लोकतंत्र को मजबूत बनाने और जनता की इच्छाओं को शासन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। चुनाव  का   महत्व:   लोकतंत्र में चुनाव का विशेष महत्व है। चुनाव के माध्यम से नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करके योग्य प्रतिनिधियों का चयन करते हैं। इससे जनता को सरकार बनाने और बदलने का अधिकार मिलता है। चुनाव राजनीतिक जागरूकता बढ़ाते हैं तथा सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। चुनावों के कारण शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है। यह नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का भी क...

स्थानीय स्वशासन

    स्थानीय स्वशासन   पंचायत राज, नगर निगम और नगर पालिका स्थानीय स्वशासन लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान करना तथा लोगों को शासन प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर प्रदान करना है। स्थानीय स्वशासन के माध्यम से नागरिक अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में सीधे योगदान दे सकते हैं। भारत में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रूप में स्थापित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत राज व्यवस्था तथा शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और नगर पालिका कार्य करती हैं। पंचायत राज व्यवस्था :   ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की प्रमुख व्यवस्था है। इसका उद्देश्य गाँवों के विकास और प्रशासन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। भारत में पंचायत राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा प्रदान किया गया। पंचायत राज व्यवस्था मुख्य रूप से तीन स्तरों पर कार्य करती है—ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (खंड स्तर) और जिला परिषद। ग्राम पंचायत सबसे निचला स्तर है, जो गाँ...

राजनीति विज्ञान में शक्ति

  राजनीति विज्ञान में शक्ति सत्ता और वैधता राजनीति विज्ञान में शक्ति, सत्ता और वैधता अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। किसी भी राज्य, सरकार या संगठन के संचालन में इन तीनों का विशेष महत्व होता है। यद्यपि शक्ति, सत्ता और वैधता एक-दूसरे से संबंधित हैं, फिर भी इनके अर्थ और स्वरूप में अंतर होता है। इन अवधारणाओं को समझे बिना राजनीतिक व्यवस्था और शासन प्रणाली को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। शक्ति (Power):   का अर्थ किसी व्यक्ति, समूह या संस्था की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह दूसरों के व्यवहार, निर्णयों या कार्यों को प्रभावित या नियंत्रित कर सकता है। शक्ति का प्रयोग विभिन्न माध्यमों जैसे धन, पद, ज्ञान, कानून, बल या प्रभाव के द्वारा किया जा सकता है। राजनीति में शक्ति का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि शासन और प्रशासन का संचालन शक्ति के आधार पर ही किया जाता है। उदाहरण के लिए, सरकार के पास कानून बनाने और उन्हें लागू करने की शक्ति होती है। शक्ति सकारात्मक भी हो सकती है और नकारात्मक भी। यदि इसका उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाए तो यह समाज के विकास में सहायक होती है, लेकिन दुरुपयोग होने पर यह अन्या...

भारतीय राजनीतिक व्यवस्था

  भारतीय राजनीतिक व्यवस्था   केंद्र सरकार भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहाँ शासन संविधान के अनुसार संचालित होता है। भारतीय राजनीतिक व्यवस्था का प्रमुख आधार संविधान है, जो देश के शासन की संरचना, शक्तियों और कार्यों को निर्धारित करता है। भारत में शासन की संघीय व्यवस्था अपनाई गई है, जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारें दोनों कार्य करती हैं। केंद्र सरकार पूरे देश के प्रशासन और राष्ट्रीय महत्व के विषयों की जिम्मेदारी निभाती है। केंद्र सरकार भारत की सर्वोच्च शासन व्यवस्था है। इसका कार्य देश की सुरक्षा, विदेश नीति, मुद्रा व्यवस्था, संचार, रेलवे, रक्षा तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के विषयों का संचालन करना है। केंद्र सरकार संविधान के अनुसार कार्य करती है और इसकी शक्तियाँ संविधान द्वारा निर्धारित की गई हैं। केंद्र सरकार के तीन प्रमुख अंग होते हैं— 1  विधायिका 2 कार्यपालिका  3 न्यायपालिका। ये तीनों अंग लोकतंत्र को मजबूत बनाने और शासन को सुचारु रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  विधायिका:    का मुख्य कार्य कानून बनाना है। भारत की केंद्रीय विधायिका को ...

संघवाद का अर्थ

 # संघीय शासन व्यवस्था (Federal System) : संघवाद का अर्थ एवं केंद्र-राज्य संबंध संघीय शासन व्यवस्था वह प्रणाली है जिसमें शासन की शक्तियाँ केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच संविधान द्वारा विभाजित की जाती हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य देश की एकता बनाए रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करना है। संघीय शासन व्यवस्था बड़े और विविधता वाले देशों के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। भारत, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में संघीय शासन व्यवस्था अपनाई गई है।  संघीय शासन व्यवस्था संघवाद का अर्थ एवं केंद्र-राज्य संबंध संघीय शासन व्यवस्था वह प्रणाली है जिसमें शासन की शक्तियाँ केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच संविधान द्वारा विभाजित की जाती हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य देश की एकता बनाए रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान करना है। संघीय शासन व्यवस्था बड़े और विविधता वाले देशों के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। भारत, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में संघीय शासन व्यवस्था अपनाई गई है। संघवाद का अर्थ  संघवाद (Federalism) एक ऐसी रा...

शक्ति

  शक्ति   शक्ति मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक तत्व है। शक्ति का सामान्य अर्थ सामर्थ्य, बल या क्षमता से है। यह केवल शारीरिक बल तक सीमित नहीं होती, बल्कि मानसिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक रूपों में भी विद्यमान होती है। शक्ति के बिना व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का विकास संभव नहीं है। यही कारण है कि शक्ति को सफलता और प्रगति का आधार माना जाता है।  मनुष्य के जीवन में शक्ति का विशेष महत्व है। शारीरिक शक्ति व्यक्ति को कठिन कार्य करने और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाती है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। इसलिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित जीवन शैली के माध्यम से शारीरिक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। शारीरिक रूप से मजबूत व्यक्ति अपने कर्तव्यों का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकता है।  मानसिक शक्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शारीरिक शक्ति। मानसिक शक्ति व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने, सही निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता प्रदान करती है। जीवन में अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब शारीरिक ...

केंद्र सरकार

   केंद्र सरकार किसी भी लोकतांत्रिक देश के सुचारु संचालन के लिए एक सशक्त और उत्तरदायी सरकार का होना आवश्यक है। भारत में शासन व्यवस्था संघीय प्रणाली पर आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर देश का प्रशासन चलाती हैं। केंद्र सरकार पूरे देश के हितों की रक्षा करने, राष्ट्रीय नीतियाँ बनाने तथा देश की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने का कार्य करती है। भारत की केंद्र सरकार का गठन भारतीय संविधान के अनुसार होता है। केंद्र सरकार के तीन प्रमुख अंग हैं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। विधायिका में संसद आती है, जो लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनी होती है। संसद कानून बनाने का कार्य करती है। कार्यपालिका का प्रमुख राष्ट्रपति होता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के पास होती है।  न्यायपालिका का सर्वोच्च संस्थान सर्वोच्च न्यायालय है, जो संविधान की रक्षा करता है और न्याय प्रदान करता है। केंद्र सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कार्य देश की एकता और अखंडता बनाए रखना है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, रक्षा, मुद्रा, रेलवे, डाक-तार, संचार तथा अंतररा...

मतदान

    मतदान   मतदान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और सरकार के गठन में भाग लेते हैं। लोकतंत्र में जनता को सर्वोच्च माना जाता है तथा मतदान के द्वारा ही जनता अपनी इच्छा और राय व्यक्त करती है।  इसलिए मतदान को नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार और कर्तव्य दोनों माना जाता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त है। भारतीय संविधान के अनुसार 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक, जो निर्वाचन सूची में पंजीकृत है, मतदान कर सकता है।  मतदान का अधिकार जाति, धर्म, भाषा, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी से नहीं छीना जा सकता। यह व्यवस्था सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार प्रदान करती है। मतदान का मुख्य उद्देश्य योग्य और सक्षम प्रतिनिधियों का चयन करना है।  जब नागरिक मतदान करते हैं, तो वे अपने क्षेत्र और देश के विकास के लिए निर्णय लेने वाले नेताओं को चुनते हैं। यदि जनता जागरूक होकर मतदान करती है, तो अच्छी और उ...

जनता

 जनता  जनता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है। किसी देश में रहने वाले सभी नागरिक मिलकर जनता कहलाते हैं। जनता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती है क्योंकि सरकार का गठन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाता है। लोकतंत्र में जनता की इच्छा और हितों को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। इसलिए कहा जाता है कि लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन है। जनता का मुख्य कार्य अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करना है। प्रत्येक नागरिक को मतदान करने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा प्राप्त करने तथा समानता का अधिकार प्राप्त होता है।  इन अधिकारों का सही उपयोग करके जनता देश के विकास में योगदान देती है। साथ ही जनता का यह भी कर्तव्य है कि वह संविधान और कानूनों का सम्मान करे, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करे तथा राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने में सहयोग करे। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में जनता की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं होती।  जनता विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करती है। जब सरकार कोई नीति य...